चलो आखिरकार अब google indic transliteration सेवा Blogger पर हिंदी और अन्य प्रादेशिक भाषाओं मे उपलब्ध है. गुजराती को शायद अभी देर है पर यहाँ तो पहोंचे! हिंदी मे लिखने के बाद उसे गुजराती मे परिवृत्त करने के लिए xlit bookmarklet का इस्तेमाल किया जा सकता है. पहेले आपको अपने Blogger account मे transliteration सेवा activate करानी पड़ेगी.
આ હુ ગુજરાતીમા લખવા માગતો હતો એટલે મેં google indic transliteration હિંદી નો ઉપયોગ કરીને દેવનાગરી લિપિમા લખ્યુ પછી preview કરીને જે 'લખાન' ગુજરાતીમા જોઇતુ હતુ તેને select કરીને xlit bookmarklet પર click કરતા તે ગુજરાતી લિપિમા પરિવર્તિત થઈ ગયુ જેને copy કરીને પાછા Compose mode મા paste કરી દિધુ.
bonus :
ગુજરાતી xlit bookmarklet xlitG
google indic transliteration सेवा Blogger पर
મંગળવાર, 24 નવેમ્બર, 2009 કાપલીઓ Blog, Bookmarklet, Google, Hindi, Indic, transliterator 1 પ્રતિભાવો, આપનો પ્રતિભાવ જણાવવા અહિં Click કરો
IndicJinie - कौनसी भाषा चाहिये मेरे आका?
શુક્રવાર, 29 મે, 2009 કાપલીઓ Google, Hindi, IndicIME, IndicJinie, Lipy, TypePad 0 પ્રતિભાવો, આપનો પ્રતિભાવ જણાવવા અહિં Click કરો
Google India Labs ने Transliteration Bookmarkletप्रस्तुत की पर शायद उसमे भी वही कमी है जो कि मेरे Lipy Bookmarklet (ગુજરાતી લખો જાદૂઈ Lipy વડે!) में थी - की IFRAME की खिडकी से दीखने वाले "sub-documents" पे वह बेअसर है। जबकी कुछ मित्रोंने इस बारे में मुझे बताया था तभी से मैने इसका हल ढूंढना शुरु कर दिया था। पर security की वजह से parent window का document ऐसे children window के documents से बात नहिं कर सकता। तो सोचा ऐसा क्यूं न हो के ईसी Typepad को जिस किसी पन्ने पर चाहीये तब हाजिर करुं, English, हिन्दी, ગુજરાતી, বাংগ্লা, ଓଡ଼ିଆ, ਗੁਰਮੁਖੀ, తెలుగు, தமிழ், ಕನ್ನಡ, മലയാളം में से किसीभी script में Type करुं, copy करके उसे गायब करके वापस मूल पन्ने पर इच्छित जगह पर paste करुं।
એક અદ્ભૂત ગુજરાતી thREADING!
સોમવાર, 15 ડિસેમ્બર, 2008 કાપલીઓ Hindi, Memories, ReadGujarati 1 પ્રતિભાવો, આપનો પ્રતિભાવ જણાવવા અહિં Click કરો
- 3/12/2008 દિવ્યભાસ્કરમાં જયેશ અધ્યારુનો સંવેદનાપૂર્ણ સંસ્મરણો સંભારતો લેખ 'એવી ખાતરી ખરી?' આવ્યો.
- 3/12/2008 દિવ્યભાસ્કરની website પર એવી ખાતરી ખરી લેખ publish કરાયો.
- 3/12/2008 કાર્તિકભાઈએ એના પર પોતાની યાદો ને જોડતી blog post એ જ નામે (એવી ખાતરી ખરી?) કરી
- 5/12/2008 એને વાંચતાં-વાંચતાં relaxed શુક્રવારી સાંજે મેં મારી comments મૂકી
- 13/12/2008 આ ત્રણેયને 21મી સદીના ગુજરાતી e-Magazine readગુજરાતી.com પર અતીતના સંભારણા નામે સંકલિત લેખ તરીકે મૂકવામાં આવ્યો
Bonus:
जब यही जीना है दोस्तों तो फ़िर मरना क्या है?
पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िक्र है
भूल गये भीगते हुए टहलना क्या है?
सीरियल्स् के किर्दारों का सारा हाल है मालूम
पर माँ का हाल पूछ्ने की फ़ुर्सत कहाँ है?
अब रेत पे नंगे पाँव टहलते क्यूं नहीं?
108 हैं चैनल् फ़िर दिल बहलते क्यूं नहीं?
इन्टरनैट से दुनिया के तो टच में हैं,
लेकिन पडोस में कौन रहता है जानते तक नहीं.
मोबाइल, लैन्डलाइन सब की भरमार है,
लेकिन जिग्ररी दोस्त तक पहुँचे ऐसे तार कहाँ हैं?
कब डूबते हुए सुरज को देखा त, याद है?
कब जाना था शाम का गुज़रना क्या है?
तो दोस्तों शहर की इस दौड़ में दौड़् के करना क्या है
जब् यही जीना है तो फ़िर मरना क्या है !!!
शायरी... direct bollywood से!
મંગળવાર, 2 ડિસેમ્બર, 2008 કાપલીઓ Hindi, Poetry, Shayari, TypePad, WriteKA 1 પ્રતિભાવો, આપનો પ્રતિભાવ જણાવવા અહિં Click કરો
आपका योगदान भी चाहिये। मैं ईसे मेरे Google Documentमें अपडेट करता रहुंगा। आप Roman लिपि में type कर सकतँ हैं, या प्रमुख TypePad का उपयोग करके हिन्दी(देवनागरी लिपि)में लिख सकतें है। अगर शायरी किसी और blog पर है जो कि roman लिपिमें है तो आप कृपया Write-K Indic Transliterator का उपयोग करके उसे देवनागरी लिपिमें ला सकते हैं। वरना बादमें मुझे वही करना पडेगा। :)
वो कत्ल भी करतें हैं तो चर्चा नहिं होता
दिलने कहा जो देखे जलवे-हुस्न-ए-यारके, लाया है कौन ईन्हें फलकपे ऊतारके।
खुदा बंदेसे खुद पूछे - 'बता, तेरी रझा क्या है'
मेरी किश्ती भी वहाँ डूबी, जहाँ पानी कम था ।।
दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना
वो शमा क्या बूझे जिसे रौशन खुदा करे
चाहनेवाले तुझे शोख-ए-ग़ज़ल कहते है।
उफ्फ़ ये संगेमर्मर सा शफ्फाक बदन,
देखनेवाले तुझे ताजमहल कहते है।
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।
तुमहि सो गये दास्तां कहेते कहेते
तेरे इश्क़ में मेरी जान फ़ना हो जाए।
सच्ची चाहत तो सदा बेज़ुबां होती है,
प्यार मे दर्द भी मिल तो क्या गभराना,
सुना है दर्द से चाहत और जवां होती है।
आशिक़ हूँ आपका, अपनी सहेली का मत समझना।
हमको भूल पाओगे कैसे?
हम वो खुशबू जो सांसों में उतार जय,
खुद अपनी सांसों को रोक पओगे कैसे?
यूँ किसिका का जाम हम पिया नही करते।
उनसे केह दो मोहब्बत का इज़हार आकर खुद करें,
यूँ किसिका पीछा हम नही करते।
बांहो मे लेले और खुद को भीग जाने दे,
है जो सीने मे कैद दरिया वो छूट जायेगा,
है इतना दर्द की तेरा दामन भीग जायेगा
मगर अब चांद पूरा हैं फलक पे और अब पूरें हैं हम।
तकलीफ तो तब होती है, जब लोग वाह-वाह करते हैं।
अब तो सिर्फ धडकनों का लिहाज करते हैं,
क्या करें इस दुनिया वालों का,
जो आखरी धडकनो पे भी ऐतराज़ करते हैं।
की दिल चुरा ले गये,
हम तो समझे थे बूत,
आप तो धड़कन सुना गये।
कि हर ज़र्रे ने तुम्हे मुझसे मिलाने की साज़िश की है
और प्यार भी एक बार ही होता है
प्यार कहती है दुनिया जिसे,एक रंगीन धोखा है और कुछ नही
खुश जो रहना हो ज़िन्दगी मे तुम्हें दिल कभी किसी से लगाना नही।
आज कहती हो इस दिलजले से प्यार है तुम्हे, कल तो मेरा नाम तक भूल जाओगी तुम
फूल खिलते हैं तो हम सोचते हैं, तेरे आने के ज़माने आए,
दिल धद्क्ता हैं सफर के समय,
काश फिर कोई बुलाने आए।
वो हवाओं की तरह रूख बदल लेते है, हम नसीबोन से लड़तें थे जिन्हे पाने के लिये
मेरी पहचान मिटा दो के में ज़िन्दा हूँ अभी
मेरी आंखों को रुला दो के में ज़िन्दा हूँ अभी
मेरे मरने की दुआ दो के में ज़िन्दा हूँ अभी
खेरखबर हिन्दुस्तान- हिन्दी समाचार Hindi News Headlines
મંગળવાર, 14 ઑક્ટોબર, 2008 કાપલીઓ Gadget, Headlines, Hindi, News 0 પ્રતિભાવો, આપનો પ્રતિભાવ જણાવવા અહિં Click કરો
...कब गझल ये बनाई
મંગળવાર, 29 જુલાઈ, 2008 કાપલીઓ Girgit, Hindi, Poetry, Sarjan 2 પ્રતિભાવો, આપનો પ્રતિભાવ જણાવવા અહિં Click કરો
હવાએં દી મૈને ઔર આંધી ચલાઈ ભરોસે કી લૌ યૂં જલાઈ-બૂઝાઈ ના સૂરજ દીખા તો દિયા બન ગયા મૈં જવાં મેહફિલોંમે ઘીરે થે કભીકે યે યારી હમારી હૈ કાયમ કે જૈસે મૈં લિખતા રહા શેર પે શેર યૂં હી | हवाएं दी मैने और आंधी चलाई भरोसे की लौ यूं जलाई-बूझाई ना सूरज दीखा तो दिया बन गया मैं जवां मेहफिलोंमे घीरे थे कभीके ये यारी हमारी है कायम के जैसे मैं लिखता रहा शेर पे शेर यूं ही |

